sucide , anxiety and depression

आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं -                         

अभी कुछ दिनों से आत्महत्या की घटनाएंँ बढ़ती जा रही है युवा कलाकार सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की घटना   ने लोगों को हिला कर रख दिया है ।लोग यह सोचने पर विवश है कि नाम पैसा ,शोहरत ,पोजीशन हासिल करने वाला इंसान भी ऐसा नकारात्मक कदम उठा सकता है। हमारे देश में ऐसे अनेक सुशांत सिंह है जो किसी डिप्रेशन किसी समस्या के कारण मौत को गले लगा लेते हैं कोई पारिवारिक कलह के कारण ,तो कोई परीक्षा में फेल होने के कारण ,कोई बीमारी से ना जाने किन किन कारणों से लोग आत्महत्या का कदम उठा लेते हैं ।मेरे विचार से आत्महत्या के पीछे सबसे प्रमुख कारण है डिप्रेशन ।भारतीय साइकोलॉजी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर श्रीवास्तव का मानना है कि आत्महत्या का प्रमुख कारण डिप्रेशन है।

डिप्रेशन का सीधा सा अर्थ है- अवसाद या निराशा ।जब व्यक्ति हताश होने लगता है तनावग्रस्त हो जाता है उसके विचार नकारात्मक होने लगते हैं वह अकेलापन महसूस करता है तब समझ जाना चाहिए कि वह डिप्रेशन में है ।डिप्रेशन के जेनेटिक, सोशल ,बायो लॉजिकल पर्सनल आदि कई कारण हो सकते हैं                                         क्या करें कि अकेलापन डिप्रेशन में ना बदले -यदि व्यक्ति किसी समस्या से परेशान है और  साथ ही अकेला भी तब स्थिति खतरनाक हो जाती हैं ।ठीक वैसे ही जैसे एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा ।ऐसे व्यक्ति दिन रात समस्या के उधेड़बुन में उलझ कर रह जाते हैं और धीरे-धीरे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।

अपने किसी ऐसे व्यक्ति से अपनी समस्या शेयर करें- जो आपको सही  राह दे ,आपका  विश्वसनीय हो ,आप दिल खोलकर उससे अपनी बात शेयर कर सके ,चाहे वह आपका कोई मित्र कलीग कजिन या रिश्तेदार हो। ऐसा कोई हमराज सलाहकार जीवन में जरूर होना चाहिए।                                                                                                          डायरी लेखन- जब व्यक्ति अकेलेपन से घिरा हो और किसी समस्या से त्रस्त हो उस स्थिति में स्वयं को    अपने विवेक को अपना मित्र बनाओ और अपनी डायरी को अपनी संगिनी ।अपनी समस्या अपनी भावनाएंँ यहांँ व्यक्त करें समस्या के क्या-क्या समाधान हो सकते हैं सभी समाधान  लिखें आपको अपनी समस्या का सही समाधान वहां से मिल जाएगा। डायरी लेखन से आपके मन की भड़ास निकल जाती है मन हल्का हो जाता है।:                                           डिप्रेशन की मुख्य वजह है तनाव- तनाव शब्द अब हमें बहुत ही नॉर्मल लगने लगा     हे आज बच्चा हो  या  बूढ़ा हर व्यक्ति तनावग्रस्त है। किसी को पढ़ाई का तनाव है तो किसी को कैरियर बनाने का। लगभग हर शख्स किसी ना किसी  कारण से कुछ ना कुछ मात्रा में तनावग्रस्त है। तनाव अब न्यू नॉर्मल बनता जा रहा है किंतु जब हद से गुजर जाता है स्थिति विस्फोटक हो जाती है। इस समय व्यक्ति आत्मघाती कदम उठाने की सोचने लगता है                                             



                         तनाव दूर करने के लिए उपाय किए जाने चाहिए-- जैसे सर्वप्रथम कार्य कारण सिद्धांत को अपनाएं अर्थात तनाव का कारण क्या है यह जाने। फिर उस कारण को कैसे कम या खत्म किया जा सकता है  विचार करें ।जब तक तनाव की वजह दूर नहीं होगी तनाव खत्म नहीं होगा                                                                                                    समस्या से संबंधित लोगों से चर्चा करें- जिस समस्या के कारण  तनाव उत्पन्न हुआ है उस समस्या से संबंधित एवं अनुभवी लोगों से चर्चा करें। कोई ना कोई हल जरूर निकल आएगा जैसे यदि बिजनेस से संबंधित समस्या हेतु इस क्षेत्र के अनुभवी बिजनेसमैन, विशेषज्ञ आदि की    सलाह काम आएगी ।।                                                                        अपने शौक को कल्पनाओं के पंख दे अपने मनपसंद रचनात्मक कार्य करने से तनाव काफी हद तक दूर होता है।योग ,व्यायाम, कसरत नियमित करें-योगाभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक मनोविकार दूर होते हैं एवं मानसिक शांति मिलती है  ।                                     मौन को त्यागे --प्रायः यह देखा गया है कि जो व्यक्ति तनाव में आता है तो वह एकदम से चुप्पी साध लेता है। परिवार से रिश्तेदारों से कटने लगता है अपने में ही खोया रहता है ।ऐसा करना घातक है परिवार के साथ हंँसे, बोले ,हो सके तो उनके बीच समस्या शेयर करें शायद कोई हल निकल आए।                                                                                             अति महत्वाकांक्षी बनेना- आज व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी बन गया है नाम पैसा शोहरत सबकुछ बहुत जल्दी हासिल कर लेना चाहता है किंतु जब महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होती है तब हताश हो जाता है  जरा सी  असफलता उसे तोड़ देती है और वह निराश होकर गलत कदम उठा लेता है। इसलिए संतोषी बनिए                                       


सकारात्मक सोच रखें -तनावग्रस्त होने पर व्यक्ति निराशा से घिर जाता है और निराश व्यक्ति  नकारात्मक बातें अधिक सोचता है। नकारात्मकता उसे गलत कदम उठाने पर मजबूर करती है इसलिए जब मन मस्तिष्क  निराशा के अंधकार से घिर जाए तब आशा का दीप जलाएं। आशावादी सोच अपनाएंँ। मोटिवेशनल स्पीकर  को सुनें, उनके विचारों से प्रेरणा लें                                                                     डिप्रैस व्यक्ति के प्रति परिवार की भूमिका --डिप्रैस व्यक्ति के लिए परिवार एक दवा है परिवार का  प्रेम ,विश्वास और मार्गदर्शन ऐसे व्यक्ति के लिए रामबाण की तरह है जो व्यक्ति डिप्रेशन में आता है  जीवन के प्रति उसका नजरिया नकारात्मक हो जाता है। उसके बोल चाल ,रंग ढंग से खतरे का संकेत होने लगता है ऐसे समय में परिवार को तुरंत उसकी      मनोदशा को भाँप लेना चाहिए इसमें देर नहीं करना चाहिए।

 परिवार को ऐसे व्यक्ति के प्रति हमेशा सचेत रहना चाहिए उसका हौसला बढ़ाते रहना चाहिए ।उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए ।साथ ही उसे बार-बार यह एहसास कराना चाहिए कि वह व्यक्ति परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है परिवार का अहम सदस्य है। उसके बिना यह घर परिवार सूना और अधूरा है।  जब व्यक्ति को अपनी कीमत और महत्व समझ आने लगती है  तब वह भूलकर भी आत्मघाती कदम नहीं उठाता है ।आत्महत्या एक आत्मघाती कदम है क्षणिक आवेश में आकर   व्यक्ति कदम उठा लेता है और परिवार को जीवन भर के लिए दुख दे जाता हैं।

 जीवन सुख -दुख ,उतार-चढ़ाव का नाम है। केरियर हो या बिजनेस हर जगह उतार-चढ़ाव आते रहते हैं परिस्थितियां कभी भी  एक जैसी नहीं रहती है बनती और बिगड़ती रहती है इसलिए बदले हुए हालात या परिस्थिति के कारण निराश होकर आत्मघाती कदम नहीं उठाना चाहिए। किसी समस्या के आने पर खुद को खत्म कर लेना मूर्खता है ।समस्या है तो समाधान भी होगा ।कोई ना  कोई हल निकल ही जाएगा जब भी आपके मन में आत्मघाती विचार आए तब यह सोचे कि मेरे इस जीवन पर सिर्फ मेरा हक नहीं है इस बार मेरे माता पिता और परिवार का भी पूरा हक है। मैं उनके लिए अनमोल हूंँ।मेरे बाद मेरे परिवार का क्या हाल होगा? उन पर दुख का पहाड़ टूट पड़ेगा। जब व्यक्ति यह सब सोचने लगेगा तो निश्चित ही वह कभी भी आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता है। हमेशा अपना हौसला मजबूत बनाए रखिए ।। रख हौसला वो मंजर भी आएगा  प्यासे के  पास चल कर समंदर भी आएगा।।            थक कर ना बैठ  मंजिल के मुसाफिर       मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी  आएगा।                                                                                       

                                                                                                 
                                                                                      

                                                       
                            

                                                                

Comments

  1. 💓😍😍💓wow yaar perfect 😊💃💃

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  2. बहुत ही सार्थक सामयिक और जरूरी आलेख । आपके बताए उपाय बहुत ही कारगर साबित होंगे ।

    सार्थक लेखन

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  3. *आत्महत्या अस्थाई समस्या का स्थाई हल है।*

    Bounce back करने के उपयुक्त प्रयास होने चाहिये।
    आपने बढ़िया लेख लिखा है।

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